अत्रि कहेउ तब भरत सन सैल

दोहा ३०९ · अयोध्याकाण्ड

दोहा पाठ

अत्रि कहेउ तब भरत सन सैल समीप सुकूप। राखिअ तीरथ तोय तहँ पावन अमिअ अनूप॥ ३०९ ॥

अर्थ

तब अत्रिजी ने भरतजी से कहा--इस पर्वत के समीप ही एक सुन्दर कुआँ है। इस पवित्र, अनुपम और अमृत-जैसे तीर्थजल को उसी में स्थापित कर दीजिये।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-भरत संवाद” प्रकरण का दोहा ३०९ है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा भरत को पितृ आज्ञा, राजधर्म और समर्पण का उपदेश का वर्णन है।

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श्रीराम-भरत संवाद