मति अनुसार सराहन लागे
मति अनुसार सराहन लागे
चौपाई ३, दोहा ३०९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
मति अनुसार सराहन लागे। सचिव सभासद सब अनुरागे॥ सुनि सुनि राम भरत संबादू। दुहु समाज हियँ हरषु बिषादू॥ ३ ॥
अर्थ
मन्त्री और सभासद सभी प्रेममुग्ध होकर अपनी-अपनी बुद्धि के अनुसार सराहना करने लगे। श्रीरामचन्द्रजी और भरतजी का संवाद सुन-सुनकर दोनों समाजों के हृदयों में हर्ष और विषाद (भरतजी के सेवाधर्म को देखकर हर्ष और रामवियोग की सम्भावना से विषाद) दोनों हुए।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-भरत संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३०९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा भरत को पितृ आज्ञा, राजधर्म और समर्पण का उपदेश का वर्णन है।
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श्रीराम-भरत संवाद