भूप सुमंत्रु लीन्ह उर लाई

चौपाई १, दोहा १४९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

भूप सुमंत्रु लीन्ह उर लाई। बूड़त कछु अधार जनु पाई॥ सहित सनेह निकट बैठारी। पूँछत राउ नयन भरि बारी॥ १ ॥

अर्थ

राजा ने सुमन्त्र को हृदय से लगा लिया। मानो डूबते हुए को कुछ सहारा मिल गया हो। मन्त्री को स्नेह के साथ पास बैठाकर नेत्रों में जल भरकर राजा पूछने लगे—

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १४९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुमंत्र-दशरथ संवाद और राम-वियोग में दशरथ का देहावसान का वर्णन है।

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दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान