राम जननि जब आइहि धाई
राम जननि जब आइहि धाई
चौपाई २, दोहा १४६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
राम जननि जब आइहि धाई। सुमिरि बच्छु जिमि धेनु लवाई॥ पूँछत उतरु देब मैं तेही।गे बनु राम लखनु बैदेही॥ २ ॥
अर्थ
श्रीरामजी की माता जब इस प्रकार दौड़ी आवेंगी जैसे नयी ब्यायी हुई गौ बछड़े को याद करके दौड़ी आती है, तब उनके पूछने पर मैं उन्हें यह उत्तर दूँगा कि श्रीराम, लक्ष्मण, सीता वन को चले गये।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “सुमंत्र का शोकमग्न अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १४६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुमंत्र का खाली रथ लेकर शोकमग्न अयोध्या में वापसी और राम-वियोग का सर्वत्र विषाद का वर्णन है।
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सुमंत्र का शोकमग्न अयोध्या लौटना