जोइ पूँछिहि तेहि ऊतरु देबा
जोइ पूँछिहि तेहि ऊतरु देबा
चौपाई ३, दोहा १४६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
जोइ पूँछिहि तेहि ऊतरु देबा। जाइ अवध अब यहु सुखु लेबा॥ पूँछिहि जबहिं राउ दुख दीना। जिवनु जासु रघुनाथ अधीना॥ ३ ॥
अर्थ
जो भी पूछेगा उसे यही उत्तर देना पड़ेगा! हाय! अयोध्या जाकर अब मुझे यही सुख लेना है! जब दुःख से दीन महाराज, जिनका जीवन श्रीरघुनाथजी के अधीन है, मुझसे पूछेंगे,
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “सुमंत्र का शोकमग्न अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १४६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुमंत्र का खाली रथ लेकर शोकमग्न अयोध्या में वापसी और राम-वियोग का सर्वत्र विषाद का वर्णन है।
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सुमंत्र का शोकमग्न अयोध्या लौटना