पुछिहहिं दीन दुखित सब माता

चौपाई १, दोहा १४६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

पुछिहहिं दीन दुखित सब माता। कहब काह मैं तिन्हहि बिधाता॥ पूछिहि जबहिं लखन महतारी। कहिहउँ कवन सँदेस सुखारी॥ १ ॥

अर्थ

जब दीन-दुखी सब माताएँ पूछेंगी, तब हे विधाता! मैं उन्हें क्या कहूँगा? जब लक्ष्मणजी की माता मुझसे पूछेंगी, तब मैं उन्हें कौन-सा सुखदायी संदेश कहूँगा?

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “सुमंत्र का शोकमग्न अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १४६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुमंत्र का खाली रथ लेकर शोकमग्न अयोध्या में वापसी और राम-वियोग का सर्वत्र विषाद का वर्णन है।

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सुमंत्र का शोकमग्न अयोध्या लौटना