राम जनमि जगु कीन्ह उजागर

चौपाई ३, दोहा २०० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

राम जनमि जगु कीन्ह उजागर। रूप सील सुख सब गुन सागर॥ पुरजन परिजन गुर पितु माता। राम सुभाउ सबहि सुखदाता॥ ३ ॥

अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी ने जन्म (अवतार) लेकर जगत् को प्रकाशित कर दिया। वे रूप, शील, सुख और समस्त गुणों के समुद्र हैं। पुरवासी, कुटुम्बी, गुरु, पिता-माता सभी को श्रीरामजी का स्वभाव सुख देने वाला है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-निषाद मिलन” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २०० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत और निषादराज के भावपूर्ण मिलन-संवाद तथा नगरवासियों की भक्ति का वर्णन है।

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भरत-निषाद मिलन