पुत्रवती जुबती जग सोई
पुत्रवती जुबती जग सोई
चौपाई १, दोहा ७५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
पुत्रवती जुबती जग सोई। रघुपति भगतु जासु सुतु होई॥ नतरु बाँझ भलि बादि बिआनी। राम बिमुख सुत तें हित जानी॥ १ ॥
अर्थ
संसार में वही युवती स्त्री पुत्रवती है जिसका पुत्र श्रीरघुनाथजी का भक्त हो। नहीं तो जो राम से विमुख पुत्र से अपना हित जानती है, वह तो बाँझ ही अच्छी। पशु की भाँति उसका ब्याना व्यर्थ ही है।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीलक्ष्मण-सुमित्रा-संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ७५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लक्ष्मण को सुमित्रा की राम-सीता सेवा हेतु प्रेरणा और आशीर्वाद का वर्णन है।
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श्रीलक्ष्मण-सुमित्रा-संवाद