पूरन राम सुपेम पियूषा

चौपाई ३, दोहा २०९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

पूरन राम सुपेम पियूषा। गुर अवमान दोष नहिं दूषा॥ रामभगत अब अमिअँ अघाहूँ। कीन्हेहु सुलभ सुधा बसुधाहूँ॥ ३ ॥

अर्थ

यह चन्द्रमा श्रीरामचन्द्रजी के सुन्दर प्रेमरूपी अमृत से पूर्ण है। यह गुरु के अवमानरूपी दोष से दूषित नहीं है। तुमने इस यशरूपी चन्द्रमा की सृष्टि करके पृथ्वी पर भी अमृत को सुलभ कर दिया। अब श्रीरामजी के भक्त इस अमृत से तृप्त हो लें।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरतजी का प्रयाग, भरद्वाज से संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २०९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरतजी का प्रयाग तीर्थ दर्शन और महर्षि भरद्वाज से भक्तिपूर्ण संवाद का वर्णन है।

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भरतजी का प्रयाग, भरद्वाज से संवाद