भूप भगीरथ सुरसरि आनी
भूप भगीरथ सुरसरि आनी
चौपाई ४, दोहा २०९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
भूप भगीरथ सुरसरि आनी। सुमिरत सकल सुमंगल खानी॥ दसरथ गुन गन बरनि न जाहीं। अधिकु कहा जेहि सम जग नाहीं॥ ४ ॥
अर्थ
राजा भगीरथ गंगा जी को लाये, जिनका स्मरण ही सम्पूर्ण सुमंगलों की खान है। दशरथजी के गुण-समूहों का तो वर्णन ही नहीं किया जा सकता; अधिक क्या, जिनकी बराबरी का जगत् में कोई नहीं है।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरतजी का प्रयाग, भरद्वाज से संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २०९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरतजी का प्रयाग तीर्थ दर्शन और महर्षि भरद्वाज से भक्तिपूर्ण संवाद का वर्णन है।
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भरतजी का प्रयाग, भरद्वाज से संवाद