पुरजन परिजन सकल निहोरी

चौपाई १, दोहा १५२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

पुरजन परिजन सकल निहोरी। तात सुनाएहु बिनती मोरी॥ सोइ सब भाँति मोर हितकारी। जातें रह नरनाहु सुखारी॥ १ ॥

अर्थ

हे तात! सब पुरवासियों और कुटुम्बियों से निहोरा (अनुरोध) करके मेरी विनती सुनाना कि वही मनुष्य मेरा सब प्रकार से हितकारी है जिसकी चेष्टा से महाराज सुखी रहें।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १५२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुमंत्र-दशरथ संवाद और राम-वियोग में दशरथ का देहावसान का वर्णन है।

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दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान