गुर सन कहब सँदेसु बार बार
गुर सन कहब सँदेसु बार बार
सोरठा १५१ · अयोध्याकाण्ड
सोरठा पाठ
गुर सन कहब सँदेसु बार बार पद पदुम गहि। करब सोइ उपदेसु जेहिं न सोच मोहि अवधपति॥ १५१ ॥
अर्थ
बार-बार चरणकमलों को पकड़कर गुरु से मेरा सन्देसा कहना कि वे वही उपदेश दें जिससे अवधपति पिताजी मेरा सोच न करें।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान” प्रकरण का सोरठा १५१ है। इस प्रकरण में सुमंत्र-दशरथ संवाद और राम-वियोग में दशरथ का देहावसान का वर्णन है।
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दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान