कहब सँदेसु भरत के आएँ

चौपाई २, दोहा १५२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

कहब सँदेसु भरत के आएँ। नीति न तजिअ राजपदु पाएँ॥ पालेहु प्रजहि करम मन बानी। सेएहु मातु सकल सम जानी॥ २ ॥

अर्थ

भरत के आने पर उनको मेरा संदेश कहना कि राजपद पा जाने पर नीति न छोड़ देना; कर्म, वचन और मन से प्रजा का पालन करना और सब माताओं को समान जानकर उनकी सेवा करना।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १५२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सुमंत्र-दशरथ संवाद और राम-वियोग में दशरथ का देहावसान का वर्णन है।

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दशरथ-सुमंत्र संवाद और दशरथ का देहावसान