पुर जन नारि मगन अति प्रीती

चौपाई १, दोहा २५२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

पुर जन नारि मगन अति प्रीती। बासर जाहिं पलक सम बीती॥ सीय सासु प्रति बेष बनाई। सादर करइ सरिस सेवकाई॥ १ ॥

अर्थ

अयोध्यापुरी के पुरुष और स्त्रियाँ सभी प्रेम में अत्यन्त मग्र हो रहे हैं। उनके दिन पलके समान बीत जाते हैं। जितनी सासुएँ थीं, उतने ही वेष (रूप) बनाकर सीताजी सब सासुओं की आदरपूर्वक एक-सी सेवा करती हैं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “वनवासियों द्वारा सत्कार, कैकेयी का पश्चाताप” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २५२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वनवासियों द्वारा भरतजी की मंडली के सत्कार और कैकेयी के गहन पश्चाताप का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
वनवासियों द्वारा सत्कार, कैकेयी का पश्चाताप