लखा न मरमु राम बिनु काहूँ
लखा न मरमु राम बिनु काहूँ
चौपाई २, दोहा २५२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
लखा न मरमु राम बिनु काहूँ। माया सब सिय माया माहूँ॥ सीयँ सासु सेवा बस कीन्हीं। तिन्ह लहि सुख सिख आसिष दीन्हीं॥ २ ॥
अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी के सिवा इस भेद को और किसी ने नहीं जाना। सब मायाएँ [पराशक्ति महामाया] श्रीसीताजी की माया में ही हैं। सीताजी ने सासुओं को सेवा से वश में कर लिया। उन्होंने सुख पाकर सीख और आशीष दीं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “वनवासियों द्वारा सत्कार, कैकेयी का पश्चाताप” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २५२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वनवासियों द्वारा भरतजी की मंडली के सत्कार और कैकेयी के गहन पश्चाताप का वर्णन है।
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वनवासियों द्वारा सत्कार, कैकेयी का पश्चाताप