पुनि कह कटु कठोर कैकेई

चौपाई २, दोहा ३५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

पुनि कह कटु कठोर कैकेई। मनहुँ घाय महुँ माहुर देई॥ जौं अंतहुँ अस करतबु रहेऊ। मागु मागु तुम्ह केहिं बल कहेऊ॥ २ ॥

अर्थ

कैकेयी फिर कड़वे और कठोर वचन बोली, मानो घाव में जहर भर रही हो। [कहती है--] जो अन्त में ऐसा ही करना था, तो आपने 'माँग, माँग' किस बल पर कहा था।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में दशरथ-कैकेयी संवाद, दो वरों की माँग और सुमंत्र द्वारा श्रीराम को महल में बुलाने का वर्णन है।

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दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना