दुइ कि होइ एक समय भुआला

चौपाई ३, दोहा ३५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

दुइ कि होइ एक समय भुआला। हँसब ठठाइ फुलाउब गाला॥ दानि कहाउब अरु कृपनाई। होइ कि खेम कुसल रौताई॥ ३ ॥

अर्थ

हे राजा! ठहाका मारकर हँसना और गाल फुलाना-क्या ये दोनों एक साथ हो सकते हैं? दानी भी कहाना और कंजूसी भी करना। क्या रजपूती में क्षेम-कुशल भी रह सकती है? (लड़ाई में बहादुरी भी दिखावें और कहीं चोट भी न लगे!)।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में दशरथ-कैकेयी संवाद, दो वरों की माँग और सुमंत्र द्वारा श्रीराम को महल में बुलाने का वर्णन है।

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दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना