ब्याकुल राउ सिथिल सब गाता
ब्याकुल राउ सिथिल सब गाता
चौपाई १, दोहा ३५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
ब्याकुल राउ सिथिल सब गाता। करिनि कलपतरु मनहुँ निपाता॥ कंठु सूख मुख आव न बानी। जनु पाठीनु दीन बिनु पानी॥ १ ॥
अर्थ
राजा व्याकुल हो गये, उनका सारा शरीर शिथिल पड़ गया, मानो हथिनी ने कल्पवृक्ष को उखाड़ फेंका हो। कण्ठ सूख गया, मुख से बात नहीं निकलती, मानो पानी के बिना पाठीनु दीन मछली तड़प रही हो।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में दशरथ-कैकेयी संवाद, दो वरों की माँग और सुमंत्र द्वारा श्रीराम को महल में बुलाने का वर्णन है।
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दशरथ-कैकेयी संवाद, सुमंत्र का राम को बुलाना