पूजीं ग्रामदेबि सुर नागा
पूजीं ग्रामदेबि सुर नागा
चौपाई ३, दोहा ८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
पूजीं ग्रामदेबि सुर नागा। कहेउ बहोरि देन बलिभागा॥ जेहि बिधि होइ राम कल्यानू। देहु दया करि सो बरदानू॥ ३ ॥
अर्थ
उन्होंने ग्रामदेवियों, देवताओं और नागों की पूजा की और फिर बलि भेंट देने को कहा (अर्थात् कार्य सिद्ध होने पर फिर पूजा करने की मनौती मानी); और प्रार्थना की कि जिस प्रकार से श्रीरामचन्द्रजी का कल्याण हो, दया करके वही वरदान दीजिये।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामराज्याभिषेक की तैयारी और देवताओं द्वारा सरस्वतीजी से वनगमन हेतु प्रार्थना का वर्णन है।
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राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना