चौकें चारु सुमित्राँ पूरी
चौकें चारु सुमित्राँ पूरी
चौपाई २, दोहा ८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
चौकें चारु सुमित्राँ पूरी। मनिमय बिबिध भाँति अति रूरी॥ आनँद मगन राम महतारी। दिए दान बहु बिप्र हँकारी॥ २ ॥
अर्थ
सुमित्राजी ने मणियों के बहुत प्रकार के अत्यन्त सुन्दर और मनोहर चौक पूरे। आनन्द में मग्न हुई श्रीरामचन्द्रजी की माता कौसल्याजी ने ब्राह्मणों को बुलाकर बहुत दान दिये।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामराज्याभिषेक की तैयारी और देवताओं द्वारा सरस्वतीजी से वनगमन हेतु प्रार्थना का वर्णन है।
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राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना