गावहिं मंगल कोकिलबयनीं

चौपाई ४, दोहा ८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

गावहिं मंगल कोकिलबयनीं। बिधुबदनीं मृगसावकनयनीं॥ ४ ॥

अर्थ

कोयल की-सी मीठी वाणी वाली, चन्द्रमा के समान मुख वाली और हिरन के बच्चे के-से नेत्रों वाली स्त्रियाँ मङ्गलगान करने लगीं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामराज्याभिषेक की तैयारी और देवताओं द्वारा सरस्वतीजी से वनगमन हेतु प्रार्थना का वर्णन है।

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राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना