पूँछे मातु मलिन मन देखी

चौपाई ३, दोहा ७३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

पूँछे मातु मलिन मन देखी। लखन कही सब कथा बिसेषी॥ गई सहमि सुनि बचन कठोरा। मृगी देखि दव जनु चहु ओरा॥ ३ ॥

अर्थ

माता ने उदास मन देखकर उनसे [कारण] पूछा। लक्ष्मणजी ने सब कथा विस्तार से कह सुनायी। सुमित्राजी कठोर वचनों को सुनकर ऐसी सहम गयीं जैसे हिरनी चारों ओर वन-दाव देखकर सहम जाती है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ७३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लक्ष्मणजी का श्रीराम के साथ वन जाने के लिए प्रेमपूर्ण आग्रह और श्रीराम द्वारा उन्हें कर्तव्य की शिक्षा का वर्णन है।

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श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद