प्रातक्रिया करि मातु पद बंदि गुरहि

दोहा २०२ · अयोध्याकाण्ड

दोहा पाठ

प्रातक्रिया करि मातु पद बंदि गुरहि सिरु नाइ। आगें किए निषाद गन दीन्हेउ कटकु चलाइ॥ २०२ ॥

अर्थ

प्रातःकाल की क्रियाएँ करके माता के चरणों की वन्दना कर और गुरुजी को सिर नवाकर भरतजी ने निषादगणों को आगे कर दिया और सेना चला दी।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-निषाद मिलन” प्रकरण का दोहा २०२ है। इस प्रकरण में भरत और निषादराज के भावपूर्ण मिलन-संवाद तथा नगरवासियों की भक्ति का वर्णन है।

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भरत-निषाद मिलन