दंड चारि महँ भा सबु पारा
दंड चारि महँ भा सबु पारा
चौपाई ५, दोहा २०२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
दंड चारि महँ भा सबु पारा। उतरि भरत तब सबहि सँभारा॥ ५ ॥
अर्थ
चार घड़ी में सब पार हो गया। उतरकर भरतजी ने तब सबको सँभाला।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-निषाद मिलन” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा २०२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत और निषादराज के भावपूर्ण मिलन-संवाद तथा नगरवासियों की भक्ति का वर्णन है।
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भरत-निषाद मिलन