प्रभु सिय लखन बैठि बट छाहीं
प्रभु सिय लखन बैठि बट छाहीं
चौपाई २, दोहा ३२१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
प्रभु सिय लखन बैठि बट छाहीं। प्रिय परिजन बियोग बिलखाहीं॥ भरत सनेह सुभाउ सुबानी। प्रिया अनुज सन कहत बखानी॥ २ ॥
अर्थ
प्रभु श्रीरामचन्द्रजी, सीताजी और लक्ष्मणजी बड़ी छाया में बैठकर प्रियजन एवं परिवार के वियोग से दुखी हो रहे हैं। भरतजी के स्नेह, स्वभाव और सुन्दर वाणी का बखान-बखानकर वे प्रिय अनुज से कहने लगे।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत की वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३२१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरतजी की अयोध्या वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास और भरत-चरित्र श्रवण की महिमा का वर्णन है।
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भरत की वापसी, पादुका स्थापना, नंदिग्राम निवास