पितु सुरपुर बन रघुबर केतू

चौपाई ४, दोहा १६४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

पितु सुरपुर बन रघुबर केतू। मैं केवल सब अनरथ हेतू॥ धिग मोहि भयउँ बेनु बन आगी। दुसह दाह दुख दूषन भागी॥ ४ ॥

अर्थ

पिताजी स्वर्ग में हैं और श्रीरामजी वन में हैं। केतु के समान केवल मैं ही इन सब अनर्थों का कारण हूँ। मुझे धिक्कार है! मैं बाँस के वन में आग उत्पन्न हुआ और कठिन दाह, दुःख और दोषों का भागी बना।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-कौसल्या संवाद और दशरथ की अंत्येष्टि” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १६४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत-कौसल्या मिलन, करुण संवाद और गुरु वसिष्ठ के मार्गदर्शन में दशरथ की अंत्येष्टि का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
भरत-कौसल्या संवाद और दशरथ की अंत्येष्टि