फिरहिं भवन प्रिय आयसु पाई

चौपाई २, दोहा २४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

फिरहिं भवन प्रिय आयसु पाई। करत परसपर राम बड़ाई॥ को रघुबीर सरिस संसारा। सीलु सनेहु निबाहनिहारा॥ २ ॥

अर्थ

अपने प्रिय सखा श्रीरामचन्द्रजी की आज्ञा पाकर वे आपस में एक-दूसरे से श्रीरामचन्द्रजी की बड़ाई करते हुए घर लौटते हैं और कहते हैं--संसार में श्रीरघुबीर के समान शील और स्नेह को निभाने वाला कौन है ?

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “कैकेयी का कोपभवन में जाना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंथरा के दुष्प्रभाव से कुबुद्धि कैकेयी के कोपभवन में जाने और अयोध्या के उत्सव पर संकट की छाया पड़ने का वर्णन है।

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कैकेयी का कोपभवन में जाना