बाल सखा सुनि हियँ हरषाहीं
बाल सखा सुनि हियँ हरषाहीं
चौपाई १, दोहा २४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
बाल सखा सुनि हियँ हरषाहीं। मिलि दस पाँच राम पहिं जाहीं॥ प्रभु आदरहिं प्रेमु पहिचानी। पूँछहिं कुसल खेम मृदु बानी॥ १ ॥
अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी के बालसखा राजतिलक का समाचार सुनकर हृदय में हर्षित होते हैं। वे दस-पाँच मिलकर श्रीरामचन्द्रजी के पास जाते हैं। प्रेम पहचानकर प्रभु श्रीरामचन्द्रजी उनका आदर करते हैं और कोमल वाणी से कुशल-क्षेम पूछते हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “कैकेयी का कोपभवन में जाना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंथरा के दुष्प्रभाव से कुबुद्धि कैकेयी के कोपभवन में जाने और अयोध्या के उत्सव पर संकट की छाया पड़ने का वर्णन है।
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कैकेयी का कोपभवन में जाना