जेहिं जेहिं जोनि करम बस भ्रमहीं
जेहिं जेहिं जोनि करम बस भ्रमहीं
चौपाई ३, दोहा २४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
जेहिं जेहिं जोनि करम बस भ्रमहीं। तहँ तहँ ईसु देउ यह हमहीं॥ सेवक हम स्वामी सियनाहू। होउ नात यह ओर निबाहू॥ ३ ॥
अर्थ
भगवान् हमें यही दें कि हम अपने कर्मवश भ्रमते हुए जिस-जिस योनि में जन्में, वहाँ-वहाँ हम तो सेवक हों और सीतापति श्रीरामचन्द्रजी हमारे स्वामी हों और यह नाता अन्त तक निभ जाय।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “कैकेयी का कोपभवन में जाना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंथरा के दुष्प्रभाव से कुबुद्धि कैकेयी के कोपभवन में जाने और अयोध्या के उत्सव पर संकट की छाया पड़ने का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
कैकेयी का कोपभवन में जाना