पथिक अनेक मिलहिं मग जाता

चौपाई २, दोहा ११२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

पथिक अनेक मिलहिं मग जाता। कहहिं सप्रेम देखि दोउ भ्राता॥ राज लखन सब अंग तुम्हारें। देखि सोचु अति हृदय हमारें॥ २ ॥

अर्थ

रास्ते में जाते हुए उन्हें अनेक यात्री मिलते हैं। वे दोनों भाइयों को देखकर उनसे प्रेमपूर्वक कहते हैं कि तुम्हारे सब अंगों में राजचिह्न देखकर हमारे हृदय में बड़ा सोच होता है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “यमुना को प्रणाम, वनवासियों का प्रेम” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ११२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में यमुना-प्रणाम और मार्ग में वनवासियों व ग्रामवासियों के प्रेममय दर्शन का वर्णन है।

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यमुना को प्रणाम, वनवासियों का प्रेम