मारग चलहु पयादेहि पाएँ

चौपाई ३, दोहा ११२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

मारग चलहु पयादेहि पाएँ। ज्योतिषु झूठ हमारें भाएँ॥ अगमु पंथु गिरि कानन भारी। तेहि महँ साथ नारि सुकुमारी॥ ३ ॥

अर्थ

[ऐसे राजचिह्नों के होते हुए भी] तुम लोग रास्ते में पैदल ही चल रहे हो, इससे हमारी समझ में आता है कि ज्योतिष-शास्त्र झूठा ही है। भारी जंगल और बड़े-बड़े पहाड़ों का दुर्गम रास्ता है। तिस पर तुम्हारे साथ सुकुमारी स्त्री है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “यमुना को प्रणाम, वनवासियों का प्रेम” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ११२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में यमुना-प्रणाम और मार्ग में वनवासियों व ग्रामवासियों के प्रेममय दर्शन का वर्णन है।

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यमुना को प्रणाम, वनवासियों का प्रेम