पुनि सियँ राम लखन कर जोरी
पुनि सियँ राम लखन कर जोरी
चौपाई १, दोहा ११२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
पुनि सियँ राम लखन कर जोरी। जमुनहि कीन्ह प्रनामु बहोरी॥ चले ससीय मुदित दोउ भाई। रबितनुजा कइ करत बड़ाई॥ १ ॥
अर्थ
फिर सीताजी, श्रीरामजी और लक्ष्मणजी ने हाथ जोड़कर यमुना जी को पुनः प्रणाम किया और सूर्यकन्या यमुना जी की बड़ाई करते हुए सीताजी सहित दोनों भाई प्रसन्नतापूर्वक आगे चले।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “यमुना को प्रणाम, वनवासियों का प्रेम” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ११२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में यमुना-प्रणाम और मार्ग में वनवासियों व ग्रामवासियों के प्रेममय दर्शन का वर्णन है।
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यमुना को प्रणाम, वनवासियों का प्रेम