नयनवंत रघुबरहि बिलोकी
नयनवंत रघुबरहि बिलोकी
चौपाई १, दोहा १३९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
नयनवंत रघुबरहि बिलोकी। पाइ जनम फल होहिं बिसोकी॥ परसि चरन रज अचर सुखारी। भए परम पद के अधिकारी॥ १ ॥
अर्थ
आँखोंवाले जीव श्रीरामचन्द्रजी को देखकर जन्म का फल पाकर शोक रहित हो जाते हैं, और अचर (पर्वत, वृक्ष, भूमि, नदी आदि) भगवान् की चरण-रज का स्पर्श पाकर सुखी होते हैं। यूँ सभी परमपद (मोक्ष) के अधिकारी हो गये।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १३९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में चित्रकूट में श्रीराम के निवास और कोल-भीलों की प्रेमपूर्ण सेवा का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा