नाथ कुसल पद पंकज देखें

चौपाई ३, दोहा ८८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

नाथ कुसल पद पंकज देखें। भयउँ भागभाजन जन लेखें॥ देव धरनि धनु धामु तुम्हारा। मैं जनु नीचु सहित परिवारा॥ ३ ॥

अर्थ

निषादराज ने उत्तर दिया-हे नाथ! आपके चरणकमल के दर्शन से ही कुशल है [आपके चरणारविन्दों के दर्शन कर] आज मैं भाग्यवान् पुरुषों की गिनती में आ गया। हे देव! यह पृथ्वी, धन और घर सब आपका है। मैं तो परिवार सहित आपका नीच सेवक हूँ।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “शृंगवेरपुर में निषादराज द्वारा सेवा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ८८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शृंगवेरपुर में निषादराज गुह द्वारा श्रीराम की प्रेमपूर्ण सेवा और भक्तिपूर्ण स्वागत का वर्णन है।

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शृंगवेरपुर में निषादराज द्वारा सेवा