नतरु जाहिं बन तीनिउ भाई

चौपाई १, दोहा २६९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

नतरु जाहिं बन तीनिउ भाई। बहुरिअ सीय सहित रघुराई॥ जेहि बिधि प्रभु प्रसन्न मन होई। करुना सागर कीजिअ सोई॥ १ ॥

अर्थ

अथवा हम तीनों भाई वन चले जायें और हे श्रीरघुनाथजी! आप श्रीसीताजी सहित [अयोध्या को] लौट जाइये। हे दयासागर! जिस प्रकार से प्रभु का मन प्रसन्न हो, वही कीजिए।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-भरतादि का संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २६९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सभा में श्रीराम और भरत के बीच धर्म, राज्य और पितृ आज्ञा विषयक गंभीर संवाद का वर्णन है।

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श्रीराम-भरतादि का संवाद