नहिं पद त्रान सीस नहिं छाया

चौपाई ३, दोहा २१६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

नहिं पद त्रान सीस नहिं छाया। पेमु नेमु ब्रतु धरमु अमाया॥ लखन राम सिय पंथ कहानी। पूँछत सखहि कहत मृदु बानी॥ ३ ॥

अर्थ

न तो उनके पैरों में जूते हैं और न सिर पर छाया है। उनका प्रेम, नियम, व्रत और धर्म निष्कपट (सच्चा) है। वे सखा निषादराज से लक्ष्मणजी, श्रीरामचन्द्रजी और सीताजी के रास्ते की बातें पूछते हैं, और वह कोमल वाणी से कहता है।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरद्वाज द्वारा भरत का सत्कार” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २१६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में महर्षि भरद्वाज द्वारा भरत और उनके साथियों का दिव्य तपोबल से अद्भुत सत्कार का वर्णन है।

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भरद्वाज द्वारा भरत का सत्कार