राम बास थल बिटप बिलोकें

चौपाई ४, दोहा २१६ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

राम बास थल बिटप बिलोकें। उर अनुराग रहत नहिं रोकें॥ देखि दसा सुर बरिसहिं फूला। भइ मृदु महि मगु मंगल मूला॥ ४ ॥

अर्थ

श्रीरामचन्द्रजी के ठहरने की जगहों और वृक्षों को देखकर उनके हृदय में प्रेम रोके नहीं रुकता। भरतजी की यह दशा देखकर देवता फूल बरसाने लगे। पृथ्वी कोमल हो गयी और मार्ग मंगल का मूल बन गया।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरद्वाज द्वारा भरत का सत्कार” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २१६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में महर्षि भरद्वाज द्वारा भरत और उनके साथियों का दिव्य तपोबल से अद्भुत सत्कार का वर्णन है।

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भरद्वाज द्वारा भरत का सत्कार