मुनि रघुबरहि लाइ उर लेहीं
मुनि रघुबरहि लाइ उर लेहीं
चौपाई ४, दोहा १३४ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
मुनि रघुबरहि लाइ उर लेहीं। सुफल होन हित आसिष देहीं॥ सिय सौमित्रि राम छबि देखहिं। साधन सकल सफल करि लेखहिं॥ ४ ॥
अर्थ
मुनिगण श्रीरामजी को हृदय से लगा लेते हैं और सफल होने के लिये आशीर्वाद देते हैं। वे सीताजी, लक्ष्मणजी और श्रीरामचन्द्रजी की छबि देखते हैं और अपने सारे साधनों को सफल हुआ समझते हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १३४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में चित्रकूट में श्रीराम के निवास और कोल-भीलों की प्रेमपूर्ण सेवा का वर्णन है।
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चित्रकूट में निवास, कोल-भीलों द्वारा सेवा