मुनि प्रभाउ जब भरत बिलोका

चौपाई १, दोहा २१५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

मुनि प्रभाउ जब भरत बिलोका। सब लघु लगे लोकपति लोका॥ सुख समाजु नहिं जाइ बखानी। देखत बिरति बिसारहिं ग्यानी॥ १ ॥

अर्थ

जब भरतजी ने मुनि के प्रभाव को देखा तो उसके सामने उन्हें [इन्द्र, वरुण, यम, कुबेर आदि] सभी लोकपालों के लोक तुच्छ जान पड़े। सुख की सामग्री का वर्णन नहीं हो सकता, जिसे देखकर ज्ञानी लोग भी वैराग्य भूल जाते हैं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरद्वाज द्वारा भरत का सत्कार” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २१५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में महर्षि भरद्वाज द्वारा भरत और उनके साथियों का दिव्य तपोबल से अद्भुत सत्कार का वर्णन है।

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भरद्वाज द्वारा भरत का सत्कार