आसन सयन सुबसन बिताना

चौपाई २, दोहा २१५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

आसन सयन सुबसन बिताना। बन बाटिका बिहग मृग नाना॥ सुरभि फूल फल अमिअ समाना। बिमल जलासय बिबिध बिधाना॥ २ ॥

अर्थ

आसन, सेज, सुन्दर वस्त्र, चँदोवे, वन, बगीचे, भाँति-भाँति के पक्षी और पशु, सुगन्धित फूल और अमृत के समान स्वादिष्ट फल, अनेकों प्रकार के (तालाब, कुएँ, बावली आदि) निर्मल जलाशय थे।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरद्वाज द्वारा भरत का सत्कार” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २१५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में महर्षि भरद्वाज द्वारा भरत और उनके साथियों का दिव्य तपोबल से अद्भुत सत्कार का वर्णन है।

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भरद्वाज द्वारा भरत का सत्कार