मोहि समान को पापनिवासू
मोहि समान को पापनिवासू
चौपाई २, दोहा १७९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
मोहि समान को पापनिवासू। जेहि लगि सीय राम बनबासू॥ रायँ राम कहुँ काननु दीन्हा। बिछुरत गमनु अमरपुर कीन्हा॥ २ ॥
अर्थ
मेरे समान पापों का घर कौन है, जिसके लिए सीताजी और श्रीरामजी का बनवास हुआ ? राजा ने श्रीरामजी को वन दिया और उनके बिछुड़ते ही अमरपुर को गमन किया।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “वसिष्ठ-भरत संवाद, चित्रकूट यात्रा की तैयारी” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १७९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में गुरु वसिष्ठ द्वारा भरत को धर्म-उपदेश और चित्रकूट यात्रा की तैयारी का वर्णन है।
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वसिष्ठ-भरत संवाद, चित्रकूट यात्रा की तैयारी