मैं सठु सब अनरथ कर हेतू
मैं सठु सब अनरथ कर हेतू
चौपाई ३, दोहा १७९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
मैं सठु सब अनरथ कर हेतू। बैठ बात सब सुनउँ सचेतू॥ बिनु रघुबीर बिलोकि अबासू। रहे प्रान सहि जग उपहासू॥ ३ ॥
अर्थ
मैं दुष्ट, जो सारे अनर्थों का कारण हूँ, बैठा सब बातें सुन रहा हूँ! श्रीरघुनाथजी से रहित घर को देखकर और जगत् के उपहास को सहकर भी ये प्राण बने हुए हैं।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “वसिष्ठ-भरत संवाद, चित्रकूट यात्रा की तैयारी” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १७९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में गुरु वसिष्ठ द्वारा भरत को धर्म-उपदेश और चित्रकूट यात्रा की तैयारी का वर्णन है।
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वसिष्ठ-भरत संवाद, चित्रकूट यात्रा की तैयारी