कहउँ साँचु सब सुनि पतिआहू

चौपाई १, दोहा १७९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

कहउँ साँचु सब सुनि पतिआहू। चाहिअ धरमसील नरनाहू॥ मोहि राजु हठि देइहहु जबहीं। रसा रसातल जाइहि तबहीं॥ १ ॥

अर्थ

मैं सत्य कहता हूँ, आप सब सुनकर विश्वास करें, धर्मशील को ही राजा होना चाहिये। मुझे राज्य हठ करके देंगे तभी पृथ्वी पाताल में धँस जायगी।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “वसिष्ठ-भरत संवाद, चित्रकूट यात्रा की तैयारी” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १७९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में गुरु वसिष्ठ द्वारा भरत को धर्म-उपदेश और चित्रकूट यात्रा की तैयारी का वर्णन है।

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वसिष्ठ-भरत संवाद, चित्रकूट यात्रा की तैयारी