मोहि लगि सहेउ सबहिं संतापू
मोहि लगि सहेउ सबहिं संतापू
चौपाई ४, दोहा ३१३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
मोहि लगि सहेउ सबहिं संतापू। बहुत भाँति दुखु पावा आपू॥ अब गोसाइँ मोहि देउ रजाई। सेवौं अवध अवधि भरि जाई॥ ४ ॥
अर्थ
मेरे लिये सब लोगों ने सन्ताप सहा और आपने भी बहुत प्रकार से दुःख पाया। अब स्वामी मुझे आज्ञा दें। मैं जाकर अवध अवधि भर अवध का सेवन करूँ।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “राम द्वारा पादुका प्रदान, भरत की विदाई” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३१३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा भरतजी को पादुका प्रदान और भरतजी की भावपूर्ण विदाई का वर्णन है।
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राम द्वारा पादुका प्रदान, भरत की विदाई