भरत सुजान राम रुख देखी

चौपाई ३, दोहा ३१३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

भरत सुजान राम रुख देखी। उठि सप्रेम धरि धीर बिसेषी॥ करि दंडवत कहत कर जोरी। राखीं नाथ सकल रुचि मोरी॥ ३ ॥

अर्थ

सुजान भरतजी श्रीरामचन्द्रजी का रुख देखकर प्रेमपूर्वक उठकर, विशेषरूप से धीरज धारण कर दण्डवत् करके हाथ जोड़कर कहने लगे--हे नाथ! आपने मेरी सभी रुचियाँ रखीं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “राम द्वारा पादुका प्रदान, भरत की विदाई” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३१३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा भरतजी को पादुका प्रदान और भरतजी की भावपूर्ण विदाई का वर्णन है।

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राम द्वारा पादुका प्रदान, भरत की विदाई