मीन पीन पाठीन पुराने
मीन पीन पाठीन पुराने
चौपाई २, दोहा १९३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
मीन पीन पाठीन पुराने। भरि भरि भार कहारन्ह आने॥ मिलन साजु सजि मिलन सिधाए। मंगल मूल सगुन सुभ पाए॥ २ ॥
अर्थ
कहार लोग पुरानी और मोटी पाठीन नामक मछलियों के भार भर-भरकर लाये। भेंट का सामान सजाकर मिलने के लिये चले तो मंगलदायक शुभ शकुन मिले।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-निषाद मिलन” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १९३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत और निषादराज के भावपूर्ण मिलन-संवाद तथा नगरवासियों की भक्ति का वर्णन है।
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भरत-निषाद मिलन