मिलि जननिहि सानुज रघुराऊ

चौपाई ४, दोहा २४५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

मिलि जननिहि सानुज रघुराऊ। गुर सन कहेउ कि धारिअ पाऊ॥ पुरजन पाइ मुनीस नियोगू। जल थल तकि तकि उतरेउ लोगू॥ ४ ॥

अर्थ

श्रीरघुनाथजी ने छोटे भाई लक्ष्मणजी सहित माता से मिलकर गुरु से कहा कि पधारिये। तदनन्तर मुनीश्वर वसिष्ठजी की आज्ञा पाकर अयोध्यावासी सब लोग जल और थल का सुभीता देख-देखकर उतर गये।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २४५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत का मंदाकिनी स्नान, चित्रकूट आगमन, राम-सीता-लक्ष्मण से करुण मिलन और दशरथ का श्राद्ध का वर्णन है।

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भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध