अति अनुराग अंब उर लाए

चौपाई ३, दोहा २४५ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

अति अनुराग अंब उर लाए। नयन सनेह सलिल अन्हवाए॥ तेहि अवसर कर हरष बिषादू। किमि कबि कहै मूक जिमि स्वादू॥ ३ ॥

अर्थ

बड़े ही अनुराग से अंब ने उन्हें उर में लगा लिया और नेत्रों से बहते स्नेह-जल से नहला दिया। उस समय के हर्ष-विषाद को कवि कैसे कहे ? जैसे गूंगा स्वाद को कैसे बताए ?

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २४५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत का मंदाकिनी स्नान, चित्रकूट आगमन, राम-सीता-लक्ष्मण से करुण मिलन और दशरथ का श्राद्ध का वर्णन है।

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भरत का चित्रकूट आगमन, मिलन और श्राद्ध