भरत राम गुन ग्राम सनेहू

चौपाई २, दोहा ३०९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

भरत राम गुन ग्राम सनेहू। पुलकि प्रसंसत राउ बिदेहू॥ सेवक स्वामि सुभाउ सुहावन। नेमु पेमु अति पावन पावन॥ २ ॥

अर्थ

भरतजी और श्रीरामचन्द्रजी के गुण-समूह की तथा प्रेम की विदेहराज जनकजी पुलकित होकर प्रशंसा कर रहे हैं। सेवक और स्वामी दोनों का सुन्दर स्वभाव है। इनके नियम और प्रेम पवित्र को भी अत्यन्त पवित्र करने वाले हैं।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “श्रीराम-भरत संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३०९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम द्वारा भरत को पितृ आज्ञा, राजधर्म और समर्पण का उपदेश का वर्णन है।

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श्रीराम-भरत संवाद