मंगलमूल रामु सुत जासू
मंगलमूल रामु सुत जासू
चौपाई ३, दोहा २ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
मंगलमूल रामु सुत जासू। जो कछु कहिअ थोर सबु तासू॥ रायँ सुभायँ मुकुरु कर लीन्हा। बदनु बिलोकि मुकुटु सम कीन्हा॥ ३ ॥
अर्थ
मङ्गलों के मूल श्रीरामचन्द्रजी जिनके पुत्र हैं, उनके लिये जो कुछ कहा जाय सब थोड़ा है। राजा ने स्वभाववश हाथ में दर्पण ले लिया और उसमें अपना मुँह देखकर मुकुट को सीधा किया।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रामराज्याभिषेक की तैयारी और देवताओं द्वारा सरस्वतीजी से वनगमन हेतु प्रार्थना का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की प्रार्थना